मैं चाँद निगल गई
There are few teams in HFM today with better reliability score than Gulzar-Vishal. You can expect a great soundtrack fom them and get it. ‘Omkara’ was eagerly awaited and what a treat it is.
I am going to post lyrics of some more songs from the album but let me start with this dhamaal of a song. If ‘kajaraare’ was the rage of last year, this one deserves every bit of fame and lip-time this year. Rekha (Bhardwaj; Vishal’s wife) proves her range once again after Bhaggmati.
Even if you are a sweet(ness)-lover, try this ‘namakeen’ for a change. I assure you ki u.Ngaliyaa.N chaaTate rah jaae.Nge.
ओमकारा (२००६)
गुलज़ार/विशाल
रेखा भारद्वाज
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मैं चाँद निगल गई
हो जी मैं चाँद निगल गई दैया रे
(भीतर भीतर आग जले
बात करूँ तो सेक लगे) २
हो मैं चाँद निगल गई दैया रे
अंग पे ऐसे छाले पड़े
तेज़ था छौंका का करूँ
सी सी करती
सी सी
सी सी करती मैं मरूँ
जबाँ पे लागा जी लागा जी रे
जबाँ पे लागा
जबाँ पे लागा लागा रे
नमक इस्क का, तेरे इस्क का
(ज़बाँ पे लागा लागा रे
नमक इस्क का, हाय तेरे इस्क का) – कोरस
जबाँ पे लागा लागा रे …
बलम से माँगा माँगा रे
बलम से माँगा रे
बलम से माँगा रे
नमक इस्क का, तेरे इस्क का
जबाँ पे लागा लागा रे …
(सभी छेड़े हैं मुझको
सिपहिये बाँके छमिये) २
उधारी देने लगे हैं
गली के बनिये वणिये
कोई तो कौड़ी तू भी लुटा दे
कोई तो कौड़ी
थोड़ी थोड़ी शहद चटा दे
थोड़ी थोड़ी
तेज था तड़का का करूँ
सी सी करती मैं मरूँ
रात भर छाना रे
रात भर छाना
रात भर छाना छाना रे
नमक इस्क का, तेरे इस्क का
जबाँ पे लागा लागा रे …
(ऐसी फूँक लगी जालिम की) २
कि बाँसुरी जैसी बाजी मैं
अरे जो भी कहा उस चंद्रभान ने
फट से हो गई राजी मैं
बाँसुरी जैसी बाजी मैं
फट से हो गई राजी मैं
हाय (कभी अँखियों से पीना
कभी होंठों से पीना) २
कभी अच्छा लगे मरना
कभी मुस्किल लगे जीना
करवट-करवट प्यास लगी थी
अजी बलम की आहट पास लगी थी
तेज था छौंका का करूँ
सी सी करती मैं मरूँ
डली भर डाला जी डाला जी डाला जी डाला जी डाला जी डाला जी रे
डली भर डाला
डली भर डाला डाला रे
नमक इश्क का
जबाँ पे लागा लागा रे …
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