न ग़िलाफ़, न लिहाफ़
Sunidhi rocks in the song. The moment she takes off with “jigar maa.N ba.Dii aag hai”, she is unstoppable. Vishal gives her some really catchy grooves (check “aise ik din dupaharii bulaay liyo re”).
Sukhwindar, for some reason, sings a couple of lines as if he’s either drunk or having too much fun. Listen to him saying ‘daa.Nt kaa nishaan chho.D de’ to see what I mean. I am sure that’s intentional and perhaps goes with the character.
This song is a riot. “wo ilaayachii khilaayake kariib aa gayaa”! man!
ओमकारा (2006)
गुलज़ार/विशाल
सुनिधि, सुखविन्दर
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सुनिधि:
डुड़ुंग डांग डुंग …
सुख:
न ग़िलाफ़, न लिहाफ़
(न ग़िलाफ़, न लिहाफ़, ठंढी हवा भी ख़िलाफ़ ससुरी) २
हो इत्ती सर्दी है किसी का लिहाफ़ लइ ले
हो जा पड़ोसी के चूल्हे से आग लइ ले
सुनिधि:
(बीड़ी जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है
डड़ंग डांग डंग …) २
(धुआँ न निकारियो लब से पिया) २
जे दुनिया बड़ी घाघ है
बीड़ी जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है
दोनों:
न ग़िलाफ़ …
सुख:
(न कसूर, न फ़तूर) २
बिना जुरम के हजूर मर गई
सुनिधि:
हो ऐसे इक दिन दुपहरी बुलाय लियो रे
बाँध घुँघरू कचहरी लगाय लियो रे
बुलाय लियो रे
बुलाय लियो रे दुपहरी
दोनों:
लगाय लियो रे
लगाय लियो रे कचहरी
अंगीठी जलाय ले
सुनिधि:
जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है
बीड़ी जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है
सुख:
हो न तो चक्कुओं की धार
हो न दराँती न कटार
न तो चक्कुओं की धार
न दराँती न कटार
ऐसे काटे कि दाँत का निसान छोड़ दे
ये कटाई तो कोई भी किसान छोड़ दे
हो ऐसे जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे रे बिल्लो
जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे
रे ऐसे जालिम का
हो ऐसे जालिम का
ऐसे जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे
सुनिधि:
(न बुलाया, न बताया) २
वाने नींद से जगाया हाय रे
ऐसा चौंके लिहाफ़ में नसीब आ गया
वो इलायची खिलायके करीब आ गया
कोयला जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ, आग है
सुख:
इत्ती सर्दी है …
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