जाने कि जाने ना … हाराकीरी कर

This is where Gulzar seems to be in his element:

कोई तो जलवा दिखा दे
गर पिया से इश्क़ है
जान जाती है तो जाए
छोटा सा तो रिस्क है

And I have no issues at all with English words (and a Japanese) in this song. It’s a fun song and they only add to the fun. Sonu and Sukhwinder sound at ease together. Sonu actually does an Annu Malik at a couple of places (listen where he sings ‘jaane ki jaane naa’), if I am not wrong and it is Annu himself.

There is a chorus piece in the song before the first stanza. I would appreciate if anyone can figure that out. It starts with “razaa bashar kii” and ends chidingly at “nahii.n sunii to hai bewaquufii” :).

जान-ए-मन (2006)
गुलज़ार/अनु मलिक
सोनू निगम, सुखविन्दर सिंह

सो:
पिया की जुदाई में
चाँद का ग़ुब्बारा है
रात को चढ़ाया था
दिन में उतारा है
सु: बेचारा बेचारा
सो: बेचारा बेचारा
दो: इश्क़ का मारा है
सो:
जाने कि जाने ना
माने कि माने ना
जाने ज़माना पर
पिया ही जाने ना
सु:
जाने कि जाने ना
माने कि माने ना
जाने ज़माना पर
पिया ही जाने ना
सो: मन जाने जान-ए-मन
सु: मन जाने जान-ए-मन
सो: पिया मन जाने ना

कोरस:
रज़ा बशर की
क़ज़ा बशर की
मज़ा बशर का
सज़ा बशर की
ज़बान सी ले
ख़ामोश पी ले
लगा ले लब से
..
तेरी आशिक़ी
तेरी दोस्ती
..
नहीं सुनी तो है बेवक़ूफ़ी

सो:
टूटी-फूटी शायरी में
लिख दिया है डायरी में
आख़री ख़्वाहिश हो तुम
लास्ट फ़रमाईश हो तुम
सु:
टूटी-फूटी शायरी में
लिख दिया है डायरी में
आख़री ख़्वाहिश हो तुम
लास्ट फ़रमाईश हो तुम
सो:
तू समझता क्यूँ नहीं है
दिल बड़ा गहरा कुआँ है
आग जलती है हमेशा
हर तरफ़ धुआँ धुआँ है
सु:
कूद जा पिया मिलेगी
हिल ज़रा दुनिया हिलेगी
दो:
वरना माइ डियर
हाराकीरी कर
हाराकीरी कर
हाराकीरी कर

==
सो:
हो कोई तो जलवा दिखा दे
गर पिया से इश्क़ है
जान जाती है तो जाए
छोटा सा तो रिस्क है
सु:
हो कोई तो जलवा दिखा दे
गर पिया से इश्क़ है
जान जाती है तो जाए
छोटा सा तो रिस्क है
सो:
तू अगर नाखून से काटे
हीरा भी कट जाएगा
सु:
आँख भर के देख ले तो
बल्ब भी फट जाएगा
सो: प्यार का सिस्टम वही है
सु: तेरा तो प्रीतम वही है
दो:
वो नहीं तो
हाराकीरी कर
हाराकीरी कर
हाराकीरी कर

Advertisements

अजनबी शहर है

I started with this album on the wrong foot. Just like any other new Gulzar album, I approached it from the lyrics’ point of view. And I was disappointed. In part because, like many others, I was put off by the usage of English words in lyrics where it seemed unnecessary. But mostly because the lyrics were either too ordinary to come from Gulzar or seemed forced.

But I heard it again. And I have started enjoying it. I still think that Gulzar is pedantic for the most part. But by pushing Gulzar to the background, I can enjoy a few songs from it. It’s actually Annu’s album. I would rank this among Annu’s better ones in recent times.

Also, the English usage do not bother me much now. Probably because I have found a convenient justification (of context) for their use, which I hope is true. In fact, I have started loving the refrain “meraa *fyuuchar* hai terii qasam” from “ishq maasoom hai” (which seems like written for a drama/nauTa.nkii kind of situation). They do sound contrived, but they don’t ruin the song for me.

This song “ajanabii shahar hai ajanabii shaam hai” does not contain any of those speedbreakers (‘shaa.cl’ doesn’t count). There are things that I do not like about the song. It’s no great shake poetically too. But the feel and the sound of the song is amazing. Kudos to Anu for arranging and executing it so well.

P.S. I was careful while transcribing and was watching for Gulzar playing Gulzar and writing an “ajanabii *sahar* hai” somewhere in between. He didn’t.

जान-ए-मन (२००६)
गुलज़ार/अनु मलिक
सोनू निगम
====================
अजनबी शहर है
अजनबी शाम है
ज़िन्दगी अजनबी
क्या तेरा नाम है

अजीब है ये ज़िन्दगी
ये ज़िन्दगी अजीब है
ये मिलती है
बिछड़ती है
बिछड़ के फिर से मिलती है

अजनबी शहर है
अजनबी शाम है

==
आपके बग़ैर भी हमें
मीठी लगें उदासियाँ
क्या, ये आपका
आपका कमाल है
शायद आपको ख़बर नहीं
हिल रही है पाँव की ज़मीं
क्या, ये आपका
आपका ख़याल है

अजनबी शहर में
ज़िन्दगी मिल गई

अजीब है ये ज़िन्दगी
ये ज़िन्दगी अजीब है
मैं समझा था क़रीब है
ये और का नसीब है

अजनबी शहर है
अजनबी शाम है

==
बात है ये इक रात की
आप बादलों पे लेटे थे
हूँ, वो याद है
आपने बुलाया था
सर्दी लग रही थी आपको
पतली चाँदनी लपेटे थे
और, शॉल में
ख़्वाब के सुलाया था

अजनबी ही सही
साँस में सिल गई

अजीब है ये ज़िन्दगी
ये ज़िन्दगी अजीब है
मेरी नहीं ये ज़िन्दगी
रक़ीब का नसीब है

न ग़िलाफ़, न लिहाफ़

Sunidhi rocks in the song. The moment she takes off with “jigar maa.N ba.Dii aag hai”, she is unstoppable. Vishal gives her some really catchy grooves (check “aise ik din dupaharii bulaay liyo re”).

Sukhwindar, for some reason, sings a couple of lines as if he’s either drunk or having too much fun. Listen to him saying ‘daa.Nt kaa nishaan chho.D de’ to see what I mean. I am sure that’s intentional and perhaps goes with the character.

This song is a riot. “wo ilaayachii khilaayake kariib aa gayaa”! man! 🙂

ओमकारा (2006)
गुलज़ार/विशाल
सुनिधि, सुखविन्दर
==================

सुनिधि:
डुड़ुंग डांग डुंग …

सुख:
न ग़िलाफ़, न लिहाफ़
(न ग़िलाफ़, न लिहाफ़, ठंढी हवा भी ख़िलाफ़ ससुरी) २
हो इत्ती सर्दी है किसी का लिहाफ़ लइ ले
हो जा पड़ोसी के चूल्हे से आग लइ ले

सुनिधि:
(बीड़ी जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है
डड़ंग डांग डंग …) २
(धुआँ न निकारियो लब से पिया) २
जे दुनिया बड़ी घाघ है
बीड़ी जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है

दोनों:
न ग़िलाफ़ …

सुख:
(न कसूर, न फ़तूर) २
बिना जुरम के हजूर मर गई
सुनिधि:
हो ऐसे इक दिन दुपहरी बुलाय लियो रे
बाँध घुँघरू कचहरी लगाय लियो रे
बुलाय लियो रे
बुलाय लियो रे दुपहरी
दोनों:
लगाय लियो रे
लगाय लियो रे कचहरी
अंगीठी जलाय ले
सुनिधि:
जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है
बीड़ी जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ बड़ी आग है

सुख:
हो न तो चक्कुओं की धार
हो न दराँती न कटार
न तो चक्कुओं की धार
न दराँती न कटार
ऐसे काटे कि दाँत का निसान छोड़ दे
ये कटाई तो कोई भी किसान छोड़ दे
हो ऐसे जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे रे बिल्लो
जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे
रे ऐसे जालिम का
हो ऐसे जालिम का
ऐसे जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे

सुनिधि:
(न बुलाया, न बताया) २
वाने नींद से जगाया हाय रे
ऐसा चौंके लिहाफ़ में नसीब आ गया
वो इलायची खिलायके करीब आ गया
कोयला जलाय ले जिगर से पिया
जिगर माँ, आग है

सुख:
इत्ती सर्दी है …

ओ साथी रे दिन डूबे ना

I will say it. Vishal should not sing. I don’t think he does even half the justice to the song that it deserves. There’s no point in making something beautiful and then ruin it yourself.

Yes, I think Vishal’s singing is the lowest point of the song. His voice sounds tired (you can literally hear the breaths even at the beginning of the song), flat and ‘kachchii’. I don’t understand MDs’ urge for singing their songs unless they can outclass the available talent or bring something new to the mic. Vishal does neither. He may be okay, but I don’t think ‘okay’ is enough with so many talented options available.

Vishal makes up a little in the arrangement though. The song starts with a beautiful guitar piece and is overall very well arranged. The melody is simple and pleasing.

This song also brings the much-maligned (on RMIM) “Gulzarish” aspect of Gulzar to the fore-front in full bloom. puure gaane se pahale cha.nd baanagiyaa.N pesh hai.n:

(सूरज के लिए) “तुम पीठ पे लेना
मैं हाथ लगाऊँ”

“कभी-कभी यूँ करना
मैं डाँटूँ और तुम डरना”

“तेरे दोहरे बदन में
सिल जाऊँगी रे
जब करवट लेगा
छिल जाऊँगी रे”

Only Gulzar can better this.

ओमकारा (२००६)
गुलज़ार/विशाल
श्रेया घोषाल, विशाल भारद्वाज
========================

ओ साथी रे
दिन डूबे ना
आ चल दिन को रोकें
धूप के पीछे दौड़ें
छाँव छुए ना
ओ साथी रे

वि:
थका-थका सूरज जब
नदी से होकर निकलेगा
श्रे:
हरी-हरी काई पे
पाँव पड़ा तो फिसलेगा
वि:
तुम रोक के रखना
मैं जाल गिराऊँ
श्रे:
तुम पीठ पे लेना
मैं हाथ लगाऊँ
दिन डूबे ना
तेरी मेरी अट्टी-बट्टी
दाँत से काटी कट्टी
रे जइयो ना
ओ पीहू रे
ओ पीहू रे
ना जइयो ना

श्रे:
हो~
कभी-कभी यूँ करना
मैं डाँटूँ और तुम डरना
वि:
उबल पड़े आँखों से
मीठे पानी का झरना
श्रे:
तेरे दोहरे बदन में
सिल जाऊँगी रे
जब करवट लेगा
छिल जाऊँगी रे
वि:
संग ले जाऊँगा
तेरी मेरी अँगनी-मँगनी
अंग संग लागी संगनी
संग ले जाऊँ
ओ पीहू रे

दोनों:
ओ साथी रे …

नैणा ठग लेंगे

Rahat Fatah Ali Khan’s voice and singing match the mood of the composition perfectly, even elevates it. At the same time though, his inconsistent pronunciation of naa/Naa takes away some pleasure. Despite that, it’s my current favorite of the lot. An infectious and beautiful melody. As for Gulzar, what can one say except just marvel..

“naiNo.n kii zubaan pe bharosaa nahii.n aataa
likhat pa.Dhat naa rasiid naa khaataa
saarii baat *hawaaii* re”

ओमकारा(२००६)
गुलज़ार/विशाल
राहत फ़तह अली ख़ान
========================

(नैणों की मत माणियो रे
नैणों की मत सुणियो) २
नैणों की मत सुणियो रे

नैणा ठग लेंगे
(नैणा ठग लेंगे, ठग लेंगे
नैणा ठग लेंगे) २

जगते जादू फूँकेंगे
जगते जगते जादू
जगते जादू फूँकेंगे रे
नींदें बंजर कर देंगे
नैणा ठग लेंगे …

(भला-मंदा देखे णा पराया णा सगा रे
नैणों को तो डसने का चस्का लगा रे) २
(नैणों का ज़हर नशीला रे
नैणों का ज़हर नशीला) २
बादलों में सतरंगियाँ बोवें
भोर तलक बरसावें
बादलों में सतरंगियाँ बोवें
नैणा बावरा कर देंगे
नैणा ठग लेंगे …

नैणा रात को चलते-चलते
स्वर्गां में ले जावें
मेघ-मल्हार के सपने बीजें
हरयाळी दिखलावें
(नैणों की ज़ुबान पे भरोसा नहीं आता
लिखत पढ़त णा रसीद णा खाता) २
सारी बात हवाई रे
सारी बात हवाई
बिण बादल बरसावें सावण
सावण बिण बरसाताँ
बिण बादल बरसावें सावण
नैणा बावरा कर देंगे
नैणा ठग लेंगे …

मैं चाँद निगल गई

There are few teams in HFM today with better reliability score than Gulzar-Vishal. You can expect a great soundtrack fom them and get it. ‘Omkara’ was eagerly awaited and what a treat it is.

I am going to post lyrics of some more songs from the album but let me start with this dhamaal of a song. If ‘kajaraare’ was the rage of last year, this one deserves every bit of fame and lip-time this year. Rekha (Bhardwaj; Vishal’s wife) proves her range once again after Bhaggmati.

Even if you are a sweet(ness)-lover, try this ‘namakeen’ for a change. I assure you ki u.Ngaliyaa.N chaaTate rah jaae.Nge.

ओमकारा (२००६)
गुलज़ार/विशाल
रेखा भारद्वाज
=================

मैं चाँद निगल गई
हो जी मैं चाँद निगल गई दैया रे
(भीतर भीतर आग जले
बात करूँ तो सेक लगे) २
हो मैं चाँद निगल गई दैया रे
अंग पे ऐसे छाले पड़े
तेज़ था छौंका का करूँ
सी सी करती
सी सी
सी सी करती मैं मरूँ
जबाँ पे लागा जी लागा जी रे
जबाँ पे लागा
जबाँ पे लागा लागा रे
नमक इस्क का, तेरे इस्क का

(ज़बाँ पे लागा लागा रे
नमक इस्क का, हाय तेरे इस्क का) – कोरस

जबाँ पे लागा लागा रे …

बलम से माँगा माँगा रे
बलम से माँगा रे
बलम से माँगा रे
नमक इस्क का, तेरे इस्क का
जबाँ पे लागा लागा रे …

(सभी छेड़े हैं मुझको
सिपहिये बाँके छमिये) २
उधारी देने लगे हैं
गली के बनिये वणिये
कोई तो कौड़ी तू भी लुटा दे
कोई तो कौड़ी
थोड़ी थोड़ी शहद चटा दे
थोड़ी थोड़ी
तेज था तड़का का करूँ
सी सी करती मैं मरूँ
रात भर छाना रे
रात भर छाना
रात भर छाना छाना रे
नमक इस्क का, तेरे इस्क का
जबाँ पे लागा लागा रे …

(ऐसी फूँक लगी जालिम की) २
कि बाँसुरी जैसी बाजी मैं
अरे जो भी कहा उस चंद्रभान ने
फट से हो गई राजी मैं
बाँसुरी जैसी बाजी मैं
फट से हो गई राजी मैं
हाय (कभी अँखियों से पीना
कभी होंठों से पीना) २
कभी अच्छा लगे मरना
कभी मुस्किल लगे जीना

करवट-करवट प्यास लगी थी
अजी बलम की आहट पास लगी थी
तेज था छौंका का करूँ
सी सी करती मैं मरूँ
डली भर डाला जी डाला जी डाला जी डाला जी डाला जी डाला जी रे
डली भर डाला
डली भर डाला डाला रे
नमक इश्क का
जबाँ पे लागा लागा रे …

जग जा री गुड़िया

Here’s a song that, for a change, is about waking up someone rather than making someone sleep. In other words, it’s an a-lorii (there’s no such word, but you get the idea), but it sounds like a lorii. In fact, I am sure it would work equally well as a lorii, specially on the little ones who care more for the sound of words than their meaning. Gulzar works both ways though.

The composition reminds me of a song from Boodhe Pahadon Par – another Gulzar, Vishal, Wadkar presentation – ‘mujhako itane se kaam par rakh lo’. But it’s probably because of the similar pace of both songs. With a simple melody, Vishal makes sure that you can easily sing it for your little one in case you have to, even if you normally keep your singing restricted to the bathroom.

Gulzar tries to keep it simple (Doesn’t he always? ;)). The song has ‘gentle’ written all over. Touches like ‘arii jag jaa/marii jag jaa/oy jag jaa’ are enchanting.

ओमकारा (२००६)
गुलज़ार/विशाल
सुरेश वाडकर
========================
जग जा री गुड़िया
मिसरी की पुड़िया
मीठे लगें दो नैना
नैनों में तेरे हम ही बसे थे
हम ही बसे हैं, है ना

ओ री रानी
गुड़िया
जग जा
अरी जग जा
मरी जग जा

जग जा री गुड़िया …

हल्का सा कोसा
सुबह का बोसा
मान जा री अब जाग जा
नाक पे तेरे
काटेगा बिच्छू
जाग जा तू मान जा
जो चाहे ले लो, दशरथ का वादा
नैनों से खोलो जी रैना
ओ री रानी, गुड़िया
जग जा
अरी जग जा
मुई जग जा

किरनों का सोना
ओस के मोती
मोतियों-सा मोगरा
तेरा बिचौना
भर-भर के डारूँ
गुलमोहर का टोकरा
और जो भी चाहो, माँगो जी माँगो
बोलो जी मेरी मैना
ओ री रानी, गुड़िया
जग जा
अरी जग जा
ओय जग जा

जग जा री गुड़िया …

ख़ूँरेज़ करिश्मा नाज़ सितम

“ख़ूँरेज़ करिश्मा नाज़ सितम”
हुस्न-ए-जाना (१९९७) – ग़ैर फ़िल्मी
गायिका: छाया गांगुली
संगीत: मुज़फ़्फ़र अली
गीत: नज़ीर अकबराबादी
——————–

ख़ूँरेज़ करिश्मा नाज़ सितम
ग़मज़ों की झुकावट वैसी ही
पलकों की झपक पुतली की फिरत
सुरमे की घुलावट वैसी ही

बेदर्द सितमगर बेपरवाह
बेकल चंचल चटकीली सी
दिल सख़्त क़यामत पत्थर सा
और बातें नर्म रसीली सी

चेहरे पर हुस्न की गर्मी से
हर आन चमकते मोती से
ख़ुशरंग पसीने की बूँदें
सौ बार झमकते मोती से

In ISB format:

% ITRANS Song #
%
\startsong
\stitle{Kuu.Nrez karishmaa naaz sitam}%
\film{Husn-e-Jaana (Non-Film)}%
\year{1997}%
\starring{}%
\singer{Chhaya Ganguli}%
\music{Muzaffar Ali}%
\lyrics{Nazir Akbarabadi}%
%
% Audio on: Music Today
% Contributor: Vinay P Jain
% Transliterator: Vinay P Jain
% Date: 21 Mar 2005
% Series: Sugam Sangeet
% Comments:
% generated using http://www.giitaayan.com
%
\printtitle
#indian
%
Kuu.Nrez karishmaa naaz sitam
Gamazo.n kii jhukaawaT waisii hii
palako.n kii jhapak putalii kii phirat
surame kii ghulaawaT waisii hii

bedard sitamagar beparawaah
bekal cha.nchal chaTakiilii sii
dil saKt qayaamat patthar saa
aur baate.n narm rasiilii sii

chehare par husn kii garmii se
har aan chamakate motii se
Kushara.ng pasiine kii buu.Nde.n
sau baar jhamakate motii se
%
#endindian
\endsong

पिया नहीं जब गाँव में

This ghazal was Chandan Das’s major claim to fame (if one can call it that). He was a regular feature on Doordarshan in 80s and I remember that I used to think of him as poor man’s Ghulam Ali. However, even though one could see the inspiration in the composition style, his voice was fresh (and softer) and his singing style different. Apart from this one, he sang another short-metered ghazal for a TV serial “Phir Wahi Talaash” — na jii bhar ke dekhaa, na kuchh baat kii / ba.Dii aarazuu thii mulaaqaat kii — which became pretty popular at the time.

This one, though no great shake poetically, was well-performed and was aired regularly on DD. I can still remember his stylish waving of hands when singing ‘aag lage sab gaa.Nv me.n’.

“बादल बरसा गली-गली हैं झूलों के त्योहार
बिन साजन मैं किसे सुनाऊँ पायल की झंकार
मैं क्या जानूँ किसने इसमें बाँधा है ताबीज़
आते जाते छेड़े मुझको बूढ़ा हार-सिंगार”

पिया नहीं जब गाँव में
आग लगे सब गाँव में

कितनी मीठी थी इमली
साजन थे जब गाँव में

उनके जाने की तारीख़
दंगल था जब गाँव में

लिखने वाले आगे लिख
लौटोगे कब गाँव में

मन का सौदा मन के मोल
कैसा है मज़हब गाँव में

In ISB format:

\startsong
\stitle{piyaa nahii.n jab gaa.Nv me.n}%
\film{(Non-film)}%
\year{}%
\starring{}%
\singer{Chandan Das}%
\music{Chandan Das}%
\lyrics{}%
%
% Audio on:
% Contributor: Vinay P Jain
% Transliterator: Vinay P Jain
% Date: 27 Nov 2004
% Series: Andaaz-e-Bayaan Aur
% Comments:
% generated using giitaayan
%
\printtitle
#indian
%
“baadal barasaa galii\-galii hai.n jhuulo.n ke tyohaar
bin saajan mai.n kise sunaauu.N paayal kii jha.nkaar
mai.n kyaa jaanuu.N kisane isame.n baa.Ndhaa hai taabiiz
aate jaate chhe.De mujhako buu.Dhaa haar\-si.ngaar”

piyaa nahii.n jab gaa.Nv me.n
aag lage sab gaa.Nv me.n

kitanii miiThii thii imalii
saajan the jab gaa.Nv me.n

unake jaane kii taariiK
da.ngal thaa jab gaa.Nv me.n

likhane waale aage likh
lauToge kab gaa.Nv me.n

man kaa saudaa man ke mol
kaisaa hai mazahab gaa.Nv me.n
%
#endindian
\endsong

जब फागुन रंग झमकते हों … तब देख बहारें होली की

Here’s the other promised Holi song. The Holi nazm that I posted yesterday and this one both were written by Nazeer (or Nazir, as his name is spelled often) Akbarabadi from 18th century, famously called “people’s poet” and “father of Urdu Nazm”.

Incidentally, he also wrote a famous poem on Diwali (par wo phir kabhii. May be around Holi, to keep things in balance). philahaal to zabaan kii saadagii aur Khastagii ka mazaa liijiye (aur Nazeer Saahab kii shoKhii kaa bhii :)). The texture of Chhaya Ganguli’s voice gives the song a unique charm.

“जब फागुन रंग झमकते हों … तब देख बहारें होली की”
हुस्न-ए-जाना (१९९७) – ग़ैर फ़िल्मी
गायिका: छाया गांगुली
संगीत: मुज़फ़्फ़र अली
गीत: नज़ीर अकबराबादी
====================================

जब फागुन रंग झमकते हों
तब देख बहारें होली की

परियों के रंग दमकते हों
ख़ुम शीशे जाम छलकते हों
महबूब नशे में छकते हों
जब फागुन रंग झमकते हों

नाच रंगीली परियों का
कुछ भीगी तानें होली की
कुछ तबले खड़कें रंग भरे
कुछ घुँघरू ताल छनकते हों
जब फागुन रंग झमकते हों

मुँह लाल गुलाबी आँखें हों
और हाथों में पिचकारी हो
उस रंग भरी पिचकारी को
अँगिया पर तक के मारी हो
सीनों से रंग ढलकते हों
तब देख बहारें होली की

जब फागुन रंग झमकते हों
तब देख बहारें होली की
In ISB format:

% ITRANS Song #
%
\startsong
\stitle{jab phaagun ra.ng jhamakate ho.n … tab dekh bahaare.n holii kii}%
\film{Husn-e-Jaana (Non-Film)}%
\year{1997}%
\starring{}%
\singer{Chhaya Ganguli}%
\music{Muzaffar Ali}%
\lyrics{Nazeer Akbarabadi}%
%
% Audio on: Times Today
% Contributor: Vinay P Jain
% Transliterator: Vinay P Jain
% Date: 21 Oct 2004
% Series: Sugam Sangeet
% Comments:
% generated using giitaayan
%
\printtitle
#indian
%
jab phaagun ra.ng jhamakate ho.n
tab dekh bahaare.n holii kii
pariyo.n ke ra.ng damakate ho.n
Kum shiishe jaam chhalakate ho.n
mahabuub nashe me.n chhakate ho.n
jab phaagun ra.ng jhamakate ho.n
naach ra.ngiilii pariyo.n kaa
kuchh bhiigii taane.n holii kii
kuchh tabale kha.Dake.n ra.ng bhare
kuchh ghu.Ngharuu taal chhanakate ho.n
jab phaagun ra.ng jhamakate ho.n
mu.Nh laal gulaabii aa.Nkhe.n ho.n
aur haatho.n me.n pichakaarii ho
us ra.ng bharii pichakaarii ko
a.Ngiyaa par tak ke maarii ho
siino.n se ra.ng Dhalakate ho.n
tab dekh bahaare.n holii kii
jab phaagun ra.ng jhamakate ho.n
tab dekh bahaare.n holii kii
%
#endindian
\endsong